फैटी लिवर आज भारत में तेजी से बढ़ती हुई हेल्थ प्रॉब्लम बन चुका है।
पहले इसे सिर्फ शराब पीने वालों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी फैटी लिवर से जूझ रहे हैं जो शराब नहीं पीते।
लंबे समय तक बाहर का खाना, मीठे ड्रिंक्स, देर रात तक जागना, कम फिजिकल एक्टिविटी और लगातार बढ़ता स्ट्रेस इसकी बड़ी वजह बन रहे हैं।
फैटी लिवर क्या होता है?
फैटी लिवर ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है।
मेडिकल भाषा में इसे हेपेटिक स्टीटोसिस कहा जाता है।
जब यह समस्या शराब की वजह से नहीं बल्कि गलत खानपान, मोटापा और खराब लाइफस्टाइल के कारण होती है, तब इसे NAFLD कहा जाता है।
जानने लायक बातें
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यह सिर्फ मोटे लोगों की बीमारी नहीं है |
पतले लोगों में भी फैटी लिवर देखा जा रहा है |
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शुरुआत में कोई बड़ा लक्षण नहीं दिखता |
अक्सर इसका पता टेस्ट या अल्ट्रासाउंड से चलता है। |
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समय रहते कंट्रोल किया जा सकता है |
शुरुआती स्टेज में यह पूरी तरह रिवर्स हो सकता है। |
मुख्य कारण
बहुत से लोग सोचते हैं कि फैटी लिवर सिर्फ ज्यादा तेल या घी खाने से होता है, लेकिन असल कारण इससे कहीं ज्यादा बड़ा है। हमारा लिवर शरीर का मेटाबॉलिक सेंटर होता है।
यह खाने को ऊर्जा में बदलने, खून को साफ करने, फैट को प्रोसेस करने और शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने का काम करता है।
जब शरीर को लगातार जरूरत से ज्यादा शुगर, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और प्रोसेस्ड फूड मिलने लगते हैं, तो लिवर पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने लगता है।
लिवर अतिरिक्त ग्लूकोज को फैट में बदलकर स्टोर करना शुरू कर देता है।
धीरे धीरे यह फैट लिवर की कोशिकाओं में जमा होने लगता है और समय के साथ फैटी लिवर की स्थिति पैदा हो सकती है।
आज की आधुनिक लाइफस्टाइल भी इसमें बड़ा योगदान देती है।
घंटों बैठकर काम करना, देर रात खाना, कम सोना और तनाव में रहना भी लिवर की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। (source)
फैटी लिवर के मुख्य कारण-
• ज्यादा मीठा खाना
आजकल लोग दिनभर में अनजाने में जरूरत से ज्यादा शुगर खा लेते हैं। सिर्फ मिठाइयां ही नहीं बल्कि बिस्किट, केक, पैकेज्ड स्नैक्स, मीठी चाय और प्रोसेस्ड फूड में भी छिपी हुई शुगर होती है।
शुगर ज्यादा लेने पर शरीर उसका इस्तेमाल पूरी तरह नहीं कर पाता और लिवर अतिरिक्त शुगर को फैट में बदलने लगता है।
लगातार ऐसा होने पर लिवर में फैट जमा होना शुरू हो सकता है।
• पैकेज्ड जूस और कोल्ड ड्रिंक
कई लोग फ्रूट जूस को हेल्दी मानकर रोज पीते हैं, लेकिन बाजार में मिलने वाले पैकेज्ड जूस में अक्सर बहुत ज्यादा शुगर और फ्रक्टोज पाया जाता है।
फ्रक्टोज सीधे लिवर में प्रोसेस होता है। जब इसकी मात्रा ज्यादा हो जाती है तो लिवर फैट जमा करना शुरू कर सकता है।
यही कारण है कि मीठे ड्रिंक्स को फैटी लिवर का बड़ा कारण माना जाता है।
• पेट की चर्बी बढ़ना
पेट के आसपास जमा होने वाला फैट सिर्फ बाहर दिखाई देने वाला फैट नहीं होता बल्कि अंदरूनी अंगों के आसपास भी जमा होता है जिसे विसरल फैट कहा जाता है।
यह फैट इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाता है और लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है। पेट का बढ़ता आकार अक्सर फैटी लिवर का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।
• देर रात खाना
रात में बहुत देर से खाना खाने से शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक प्रभावित होती है। जब लोग देर रात भारी खाना खाते हैं तो शरीर उस ऊर्जा को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता।
ऐसी स्थिति में अतिरिक्त कैलोरी फैट के रूप में स्टोर होने लगती है।
• फिजिकल एक्टिविटी की कमी
आज की बैठकर काम करने वाली लाइफस्टाइल फैटी लिवर के सबसे बड़े कारणों में से एक है।जब शरीर कम एक्टिव होता है तो कैलोरी खर्च कम होती है और फैट जमा होने की संभावना बढ़ जाती है।
• नींद की कमी और स्ट्रेस
बहुत कम लोग जानते हैं कि खराब नींद और तनाव भी लिवर हेल्थ को प्रभावित कर सकते हैं।
लगातार तनाव रहने पर कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है जो शरीर में फैट स्टोरेज को बढ़ावा देता है। कम नींद लेने से भी हार्मोनल असंतुलन बढ़ सकता है। (source)
शुरुआती लक्षण
फैटी लिवर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण बहुत हल्के होते हैं। कई बार व्यक्ति को सालों तक पता नहीं चलता कि उसके लिवर में फैट जमा हो रहा है।
अक्सर लोग इन संकेतों को सामान्य थकान या डाइजेशन समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
आम संकेत
• हर समय थकान महसूस होना- अगर पर्याप्त नींद लेने के बाद भी पूरे दिन थकान बनी रहती है तो यह फैटी लिवर का संकेत हो सकता है।
लिवर शरीर में ऊर्जा के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है और जब इसकी कार्यक्षमता कम होती है तो शरीर जल्दी थकने लगता है।
• पेट के दाईं तरफ भारीपन- लिवर शरीर के दाईं तरफ ऊपरी हिस्से में होता है। जब लिवर में सूजन या फैट बढ़ता है तो वहां हल्का दबाव या भारीपन महसूस हो सकता है।
• खाना खाने के बाद गैस या सूजन- फैटी लिवर का असर पाचन प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।
खाना खाने के बाद पेट फूला हुआ महसूस होना या भारीपन महसूस होना एक शुरुआती संकेत हो सकता है।
• वजन तेजी से बढ़ना- खासकर पेट के आसपास तेजी से फैट जमा होना फैटी लिवर से जुड़ा हो सकता है।
• ब्लड शुगर बढ़ना- फैटी लिवर और इंसुलिन रेजिस्टेंस का सीधा संबंध होता है।
इसलिए कई लोगों में प्रीडायबिटीज या डायबिटीज भी देखने को मिलती है।
• स्किन डल दिखना- लिवर शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जब इसकी क्षमता प्रभावित होती है तो इसका असर त्वचा पर भी दिखाई दे सकता है।(source)

क्या खाना चाहिए
फैटी लिवर होने का मतलब यह नहीं है कि आपको बहुत सख्त डाइट फॉलो करनी होगी या सिर्फ उबला हुआ खाना खाना पड़ेगा।
सही फूड का चुनाव करना सबसे ज्यादा जरूरी होता है।
ऐसी चीजें जो फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर हों, वे लिवर पर अतिरिक्त दबाव कम करने और शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।
भारतीय रसोई में कई ऐसी पारंपरिक चीजें मौजूद हैं जो लिवर हेल्थ को सपोर्ट कर सकती हैं।
फायदेमंद चीजें
• आंवला- आंवला विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है।
यह शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करने में मदद कर सकता है और लिवर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में सहायक माना जाता है।
• हल्दी- हल्दी में करक्यूमिन नाम का सक्रिय तत्व पाया जाता है जो एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है।
यह लिवर में सूजन कम करने और कोशिकाओं को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है।
• मूंग दाल- मूंग दाल हल्की, आसानी से पचने वाली और प्रोटीन से भरपूर होती है।
यह शरीर को जरूरी पोषण देती है और भारी तले हुए भोजन की तुलना में लिवर पर कम दबाव डालती है।
• मेथी दाना- मेथी दाना फाइबर का अच्छा स्रोत है और ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद कर सकता है।
ब्लड शुगर नियंत्रण बेहतर होने से लिवर पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
• करेला- करेला इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने में सहायक माना जाता है।
यह शरीर में ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
• हरी सब्जियां- पालक, ब्रोकोली, लौकी और अन्य हरी सब्जियां फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होती हैं।
ये पाचन सुधारने और शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने में मदद करती हैं।
• ब्लैक कॉफी- सीमित मात्रा में ब्लैक कॉफी कुछ अध्ययनों में लिवर हेल्थ के लिए फायदेमंद पाई गई है।
इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट लिवर की सूजन कम करने और उसकी कार्यक्षमता को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं।(source)
आसान तरीके
फैटी लिवर को ठीक करने के लिए हमेशा दवा ही पहला समाधान नहीं होती। शुरुआती स्टेज में कई लोगों में सही खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव से अच्छा सुधार देखा जा सकता है।

सबसे जरूरी बात यह समझना है कि फैटी लिवर अचानक एक दिन में नहीं बनता, इसलिए इसे ठीक होने में भी समय लगता है।
छोटे लेकिन लगातार किए गए बदलाव लंबे समय में बड़ा असर दिखा सकते हैं।
अगर रोज की आदतों में सुधार किया जाए तो लिवर में जमा फैट कम होने और उसकी कार्यक्षमता बेहतर होने में मदद मिल सकती है।
फैटी लिवर का पता कैसे चलता है?
फैटी लिवर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण अक्सर बहुत हल्के होते हैं या कई बार बिल्कुल दिखाई नहीं देते।
यही वजह है कि बहुत से लोगों को इसका पता अचानक किसी हेल्थ चेकअप, ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड के दौरान चलता है।
कई लोग लगातार थकान, पेट में भारीपन या वजन बढ़ने जैसे संकेतों को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि ये फैटी लिवर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

अगर आपके परिवार में डायबिटीज, मोटापा या लिवर से जुड़ी समस्याओं का इतिहास है, तो नियमित जांच करवाना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है।
समय रहते सही जांच करवाने से फैटी लिवर को शुरुआती स्टेज में पहचानकर उसे नियंत्रित करना आसान हो सकता है।
जरूरी जांच-
• लिवर फंक्शन टेस्ट यानी LFT- लिवर फंक्शन टेस्ट फैटी लिवर की जांच के लिए सबसे सामान्य ब्लड टेस्ट में से एक माना जाता है। इसमें SGPT, SGOT और अन्य लिवर एंजाइम की जांच की जाती है।
अगर इन एंजाइम का स्तर सामान्य से ज्यादा होता है, तो यह लिवर में सूजन या किसी समस्या का संकेत हो सकता है।
हालांकि सिर्फ LFT के आधार पर फैटी लिवर की पुष्टि नहीं की जाती क्योंकि कुछ लोगों में फैटी लिवर होने के बावजूद रिपोर्ट सामान्य भी आ सकती है।
• अल्ट्रासाउंड- अल्ट्रासाउंड फैटी लिवर की पहचान के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली जांच है।
इसमें साउंड वेव्स की मदद से लिवर की तस्वीर बनाई जाती है जिससे डॉक्टर देख सकते हैं कि लिवर में फैट जमा हुआ है या नहीं।
यह जांच दर्द रहित होती है और कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है।
• फाइब्रोस्कैन- फाइब्रोस्कैन एक एडवांस जांच है जो सिर्फ फैट की मात्रा ही नहीं बल्कि लिवर की कठोरता और डैमेज के स्तर की भी जानकारी देती है।
अगर डॉक्टर को लगता है कि फैटी लिवर के कारण फाइब्रोसिस या स्कार टिशू बनने लगे हैं, तो वे यह जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
• लिपिड प्रोफाइल- लिपिड प्रोफाइल टेस्ट शरीर में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर की जांच करता है।
जिन लोगों में खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड ज्यादा होते हैं, उनमें फैटी लिवर का खतरा भी बढ़ सकता है।
यह टेस्ट शरीर की मेटाबॉलिक स्थिति समझने में मदद करता है।
• ब्लड शुगर टेस्ट- फैटी लिवर और इंसुलिन रेजिस्टेंस का आपस में गहरा संबंध माना जाता है।
इसलिए डॉक्टर अक्सर ब्लड शुगर या HbA1c टेस्ट की सलाह भी देते हैं।
इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि शरीर ग्लूकोज को सही तरीके से इस्तेमाल कर रहा है या नहीं।
एक जरूरी बात याद रखें कि किसी एक टेस्ट के आधार पर फैटी लिवर की पूरी तस्वीर नहीं मिलती। डॉक्टर अक्सर कई जांचों को साथ देखकर स्थिति का सही आकलन करते हैं।
शुरुआती पहचान जितनी जल्दी होगी, फैटी लिवर को नियंत्रित करने की संभावना उतनी ही बेहतर हो सकती है।(source)
फैटी लिवर में लिवर डिटॉक्स कॉफी के फायदे
फैटी लिवर की समस्या बढ़ने के साथ लोग ऐसे विकल्प ढूंढ रहे हैं जो उनकी डाइट और लाइफस्टाइल को बेहतर तरीके से सपोर्ट कर सकें।

लिवर डिटॉक्स कॉफी इसी तरह का एक विकल्प है जिसे रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।
यह सामान्य कॉफी से अलग होती है क्योंकि इसमें सिर्फ कॉफी नहीं बल्कि लिवर हेल्थ को सपोर्ट करने वाले कई हर्बल और न्यूट्रिशनल तत्व शामिल किए जाते हैं।
इस फॉर्मूले में मिल्क थिसल, पिक्रोराइजा कुर्रोआ, डैंडेलियन रूट, विटामिन B6, विटामिन E और विटामिन B12 जैसे तत्व मौजूद हैं जो लिवर की कार्यक्षमता को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं।
संभावित फायदे
• फैटी लिवर डिटॉक्स को सपोर्ट कर सकती है- लिवर डिटॉक्स कॉफी में मौजूद हर्बल तत्व शरीर की प्राकृतिक डिटॉक्स प्रक्रिया को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं और लिवर पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
• SGPT और SGOT लेवल को सपोर्ट कर सकती है- फैटी लिवर वाले लोगों में लिवर एंजाइम बढ़े हुए दिखाई दे सकते हैं।
कुछ तत्व लिवर की सामान्य कार्यक्षमता बनाए रखने में सहायता कर सकते हैं।
• लिवर सेल हेल्थ को सपोर्ट कर सकती है- इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करने और लिवर कोशिकाओं की सुरक्षा में मदद कर सकते हैं।
• मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा स्तर को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है- कॉफी में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर की ऊर्जा और मेटाबॉलिक गतिविधियों को सपोर्ट कर सकते हैं।
ध्यान रखें कि लिवर डिटॉक्स कॉफी को संतुलित आहार, एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ लेना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
यह किसी मेडिकल इलाज का विकल्प नहीं बल्कि एक सपोर्टिव न्यूट्रिशनल विकल्प हो सकती है।
निष्कर्ष
फैटी लिवर सिर्फ एक मेडिकल रिपोर्ट में दिखाई देने वाली स्थिति नहीं है बल्कि यह शरीर का शुरुआती चेतावनी संकेत भी हो सकता है कि आपकी लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव की जरूरत है।
अच्छी बात यह है कि शुरुआती स्टेज में फैटी लिवर को काफी हद तक नियंत्रित और कई मामलों में रिवर्स भी किया जा सकता है।
इसके लिए किसी बहुत कठिन डाइट या अचानक बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होती, बल्कि रोज की छोटी आदतों में सुधार ज्यादा असर दिखा सकता है।
संतुलित आहार लेना, प्रोसेस्ड और ज्यादा मीठी चीजों से दूरी बनाना, रोजाना कुछ समय वॉक करना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव कम करना लिवर हेल्थ को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
साथ ही अगर लगातार थकान, पेट में भारीपन या लिवर रिपोर्ट में बदलाव दिखाई दें, तो समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
सही समय पर उठाया गया कदम भविष्य में गंभीर समस्याओं से बचाने में मदद कर सकता है।
1. क्या फैटी लिवर पूरी तरह ठीक हो सकता है?
हाँ, फैटी लिवर शुरुआती स्टेज में काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। अगर यह ग्रेड 1 या शुरुआती स्तर पर है, तो सही खानपान, नियमित एक्सरसाइज और वजन कम करने से लिवर में जमा फैट घट सकता है।
कई अध्ययनों में पाया गया है कि शरीर के वजन में लगभग 7 से 10 प्रतिशत की कमी भी लिवर फैट को कम करने में मदद कर सकती है।
हालांकि अगर समस्या लंबे समय तक अनदेखी की जाए और फाइब्रोसिस या सिरोसिस तक पहुंच जाए, तो पूरी तरह रिवर्स करना मुश्किल हो सकता है।
2. फैटी लिवर ठीक होने में कितना समय लगता है?
फैटी लिवर ठीक होने का समय हर व्यक्ति में अलग हो सकता है क्योंकि यह बीमारी की स्टेज, उम्र, खानपान और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है।
शुरुआती ग्रेड 1 फैटी लिवर में लगातार सही डाइट और शारीरिक गतिविधि के साथ 3 से 6 महीने के अंदर सुधार दिखाई देना शुरू हो सकता है।
अगर स्थिति ज्यादा गंभीर हो, तो इसमें 6 महीने से एक साल या उससे ज्यादा समय भी लग सकता है। सबसे जरूरी बात नियमितता बनाए रखना है।
3. क्या पतले लोगों को भी फैटी लिवर हो सकता है?
हाँ, यह एक बहुत बड़ा भ्रम है कि फैटी लिवर सिर्फ मोटे लोगों को होता है। आजकल पतले लोगों में भी फैटी लिवर तेजी से देखा जा रहा है जिसे लीन फैटी लिवर कहा जाता है।
भारतीय लोगों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है क्योंकि शरीर के अंदर पेट के आसपास फैट जमा होने की प्रवृत्ति अधिक होती है।
बाहर से व्यक्ति फिट दिख सकता है लेकिन अंदरूनी अंगों के आसपास जमा फैट लिवर को प्रभावित कर सकता है।
4. क्या फैटी लिवर में चावल खाना बंद करना चाहिए?
नहीं, फैटी लिवर होने का मतलब यह नहीं है कि आपको पूरी तरह चावल छोड़ देना चाहिए। जरूरी बात इसकी मात्रा और प्रकार पर ध्यान देना है।
बहुत ज्यादा सफेद चावल खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकती है जिससे लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
बेहतर विकल्प यह हो सकता है कि आप सीमित मात्रा में चावल खाएं और उसके साथ पर्याप्त सब्जियां, प्रोटीन और फाइबर शामिल करें ताकि ब्लड शुगर संतुलित रहे।
5. क्या फैटी लिवर में दूध पी सकते हैं?
हाँ, फैटी लिवर में दूध पिया जा सकता है लेकिन सही विकल्प चुनना जरूरी है। लो फैट या टोंड दूध बेहतर माना जाता है क्योंकि इसमें फैट कम होता है।
बहुत ज्यादा शक्कर वाले मिल्कशेक, फ्लेवर्ड दूध या क्रीम से भरपूर डेयरी उत्पादों से बचना चाहिए।
दूध में प्रोटीन और कैल्शियम होता है जो शरीर के लिए जरूरी है, इसलिए इसे पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं होती।
6. क्या फैटी लिवर में अंडा खाना सही है?
हाँ, फैटी लिवर वाले लोग अंडा खा सकते हैं और कई मामलों में यह फायदेमंद भी माना जाता है। अंडे में अच्छी गुणवत्ता वाला प्रोटीन और कोलीन पाया जाता है।
कोलीन ऐसा पोषक तत्व है जो लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि इसे संतुलित मात्रा में खाना जरूरी है और अगर किसी व्यक्ति को कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी समस्या है तो डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
7. क्या ब्लैक कॉफी फायदेमंद है?
कई रिसर्च में यह देखा गया है कि सीमित मात्रा में ब्लैक कॉफी लिवर हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और कुछ सक्रिय तत्व लिवर में सूजन कम करने और लिवर एंजाइम को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बहुत ज्यादा कॉफी पीना शुरू कर दिया जाए। दिन में 2 से 3 कप बिना ज्यादा चीनी वाली ब्लैक कॉफी पर्याप्त मानी जाती है।
8. क्या फैटी लिवर से डायबिटीज हो सकती है?
फैटी लिवर और डायबिटीज का गहरा संबंध माना जाता है। जब लिवर में फैट जमा होने लगता है तो शरीर इंसुलिन को प्रभावी तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता।
इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। समय के साथ यही स्थिति ब्लड शुगर बढ़ने का कारण बन सकती है और डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।
इसी वजह से डॉक्टर अक्सर फैटी लिवर वाले लोगों को ब्लड शुगर की नियमित जांच कराने की सलाह देते हैं।
9. क्या बच्चों में भी फैटी लिवर हो सकता है?
हाँ, पहले फैटी लिवर को वयस्कों की समस्या माना जाता था लेकिन अब बच्चों में भी यह तेजी से बढ़ रहा है।
लगातार जंक फूड खाना, मीठे ड्रिंक्स पीना, घंटों मोबाइल या स्क्रीन के सामने बैठना और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके मुख्य कारण हैं।
बच्चों में शुरुआती संकेत अक्सर नजर नहीं आते, इसलिए अगर वजन तेजी से बढ़ रहा है तो समय पर जांच करवाना जरूरी हो सकता है।
10. क्या फैटी लिवर खतरनाक हो सकता है?
शुरुआती स्टेज में फैटी लिवर बहुत गंभीर नहीं माना जाता लेकिन अगर इसे लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो यह धीरे धीरे खतरनाक स्थिति में बदल सकता है।
पहले लिवर में सूजन बढ़ती है, फिर फाइब्रोसिस यानी स्कार टिशू बनने लगते हैं और बाद में सिरोसिस जैसी गंभीर समस्या हो सकती है।
इसलिए इसे सिर्फ एक छोटी रिपोर्ट की समस्या समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।





